करतार सिंह सराभा
"मुझे फिर से भारत में जन्म मिले, ताकि मैं फिर देश के लिए बलिदान दे सकूँ।"
गदर पार्टी के अमर शहीदों की प्रेरणा से — एक शांतिपूर्ण जन-आंदोलन। 15 जुलाई से हर नागरिक रोज़ एक घंटा देश की सेवा, जागरूकता और स्वच्छ प्रशासन को दे।
गदर आंदोलन के नायक — जिन्होंने विदेश की सुख-सुविधा छोड़कर मातृभूमि के लिए सर्वस्व न्योछावर कर दिया।
"मुझे फिर से भारत में जन्म मिले, ताकि मैं फिर देश के लिए बलिदान दे सकूँ।"
"देश की सेवा में बिताया हर पल जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य है।"
"अपने विचारों को इतना ऊँचा उठाओ कि वे राष्ट्र को जगा दें।"
"मातृभूमि के लिए फाँसी का फंदा भी फूलों का हार है।"
"कष्ट सहना ही क्रांतिकारी की सच्ची शिक्षा है।"
"वे मुझे मार सकते हैं, लेकिन मेरे विचारों को नहीं।"
लाला हरदयाल, सोहन सिंह भकना, करतार सिंह सराभा, भाई परमानंद और तारकनाथ दास ने पार्टी की नींव रखी। साप्ताहिक "गदर" अखबार के पहले पन्ने पर लिखा होता था — "अंग्रेज़ी राज का दुश्मन"।
कनाडा से लौटाए गए जहाज़ के निर्दोष यात्रियों पर कलकत्ता में ब्रिटिश पुलिस ने गोलियाँ चलाईं। इस अन्याय ने पूरे प्रवासी भारत को झकझोर दिया।
हज़ारों गदरी भारत लौटे, पर मुखबिरी से योजना उजागर हो गई। लाहौर षड्यंत्र केस में 19 वर्षीय करतार सिंह सराभा समेत कई क्रांतिकारियों को फाँसी हुई, अनेकों को काला पानी भेजा गया।
भगत सिंह करतार सिंह सराभा को अपना हीरो मानते थे। उसी चिंगारी को हम आज सेवा की मशाल बनाते हैं — शांतिपूर्ण, संविधान-सम्मत जन-आंदोलन के रूप में।
आज़ाद भारत में हमारी लड़ाई अज्ञानता, उदासीनता और भ्रष्टाचार से है — पूरी तरह शांतिपूर्ण और संविधान के दायरे में।
हर सदस्य रोज़ दो लोगों को उनके अधिकारों, कर्तव्यों और सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूक करे।
आस-पास के लोगों को देशहित के रचनात्मक कामों के लिए इकट्ठा करें — सफ़ाई, शिक्षा, रक्तदान, वृक्षारोपण, मतदाता जागरूकता।
RTI और कानूनी माध्यमों से पारदर्शिता की माँग। पूर्णकालिक सेवा देने वाले संगठन के समर्पित कार्यकर्ता बनें।
1913 में उन्होंने देश के लिए जान दी थी। 2026 में हम देश के लिए सिर्फ़ एक घंटा दें — यही उनके सपनों का सच्चा प्रणाम है।
जो देश के लिए मिटे, वे अमर हो गए। अब वक़्त है देश के लिए जीने का।
"मैं सहमत हूँ कि रोज़ एक घंटा देश के लिए देना हर नागरिक का कर्तव्य है।" — अगर आप सहमत हैं, तो अपना नाम, ईमेल और फ़ोन दर्ज करें। आपका नाम इस आंदोलन की ताक़त बनेगा।